देहरादून सृष्टि हत्याकांड: पिता की क्रिया से सीधे पुलिस हिरासत में आरोपी पति, तंत्र-मंत्र की कहानी भी जांच के दायरे में
देहरादून के हर्रावाला में सरकारी स्कूल की शिक्षिका सृष्टि कंडारी की संदिग्ध मौत मामले में पुलिस ने पति सौरभ खत्री और ननद सुरभि उर्फ चारू को गिरफ्तार किया। दहेज उत्पीड़न और दहेज हत्या समेत कई धाराओं में केस दर्ज।
देहरादून: देहरादून के हर्रावाला क्षेत्र में सरकारी स्कूल की शिक्षिका सृष्टि कंडारी (खत्री) की संदिग्ध मौत के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए उनके पति सौरभ खत्री और ननद सुरभि खत्री उर्फ चारू को गिरफ्तार कर लिया है। मामले में दहेज प्रताड़ना और दहेज हत्या सहित अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस अब सास समेत अन्य आरोपितों की भूमिका की भी जांच कर रही है।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रमेन्द्र सिंह डोबाल ने बताया कि घटना के बाद सृष्टि का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। वीडियो में सृष्टि ने अपने पति, सास और ननद पर मानसिक एवं शारीरिक प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए थे। वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपितों की गिरफ्तारी की।
देखिए वीडियो
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नवंबर 2025 में हुई थी शादी
पुलिस के अनुसार, श्रीकोट (श्रीनगर, पौड़ी गढ़वाल) निवासी सीमा कंडारी ने डोईवाला कोतवाली में शिकायत दर्ज कराई कि उनकी बेटी सृष्टि कंडारी की शादी नवंबर 2025 में हर्रावाला निवासी सौरभ खत्री से हुई थी। सृष्टि टिहरी गढ़वाल के विकासखंड कीर्तिनगर स्थित राजकीय इंटर कॉलेज रिगोली (मल्ली) में शिक्षिका के पद पर कार्यरत थीं।
दहेज प्रताड़ना और मानसिक उत्पीड़न के आरोप
परिजनों का आरोप है कि शादी के बाद से ही सृष्टि को दहेज की मांग को लेकर मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था।
उन्हें कथित तौर पर “मनहूस” कहकर अपमानित किया जाता था और परिवार में हुई अनिष्ट घटनाओं, ससुर की बीमारी तथा बाद में हुई मृत्यु के लिए भी जिम्मेदार ठहराया जाता था। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि 29 जुलाई को सृष्टि की हत्या कर दी गई, जिसमें पति, सास, ननद और अन्य परिजनों की भूमिका है।
पिता के अंतिम संस्कार के दौरान हुई गिरफ्तारी.……
पुलिस ने बताया कि आरोपी पति सौरभ खत्री को उसके पिता के निधन के बाद अंतिम संस्कार की रस्मों के दौरान गिरफ्तार किया गया। वहीं ननद सुरभि खत्री उर्फ चारू को भी पुलिस ने हिरासत में ले लिया। सास की भूमिका की जांच अभी जारी है। मामले में कथित तौर पर तंत्र-मंत्र से जुड़े पहलुओं की भी चर्चा सामने आई है। हालांकि पुलिस ने स्पष्ट किया है कि इस संबंध में अभी जांच जारी है और किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। जांच पूरी होने के बाद ही इस पहलू पर आधिकारिक जानकारी दी जाएगी।
पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बना मामला…..
सृष्टि की मौत और उसके वायरल वीडियो के बाद यह मामला पूरे उत्तराखंड में चर्चा का विषय बन गया है। आरोपी सौरभ खत्री के सचिवालय से जुड़े होने के कारण मामले पर शासन स्तर तक नजर रखी जा रही है। पुलिस का कहना है कि सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच की जा रही है और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
सृष्टि कंडारी की मौत: चुप्पी, प्रताड़ना, अंधविश्वास और समाज के लिए एक चेतावनी
यह घटना हमारे समाज के सामने एक बड़ा और असहज प्रश्न खड़ा करती है—आखिर आज भी अनेक महिलाएं अपनी पीड़ा को चुपचाप सहना ही अपना कर्तव्य क्यों समझती हैं? रिश्तों को बचाने, परिवार की प्रतिष्ठा बनाए रखने और समाज की आलोचना के भय से वे अपने दर्द को अपने भीतर ही दबाए रखती हैं। उन्हें विश्वास होता है कि समय के साथ परिस्थितियां बदल जाएंगी, लेकिन जब संवाद समाप्त हो जाता है और प्रताड़ना लगातार बढ़ती जाती है, तब यही चुप्पी कई बार एक दुखद त्रासदी का कारण बन जाती है।
सृष्टि कंडारी प्रकरण इसी चुप्पी, मानसिक प्रताड़ना और सामाजिक दबाव का एक गंभीर उदाहरण बनकर सामने आया है। इस मामले का अंतिम सत्य पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया से ही सामने आएगा, इसलिए किसी भी व्यक्ति की कानूनी जिम्मेदारी का निर्धारण न्यायालय का विषय है। लेकिन इस घटना ने समाज को मानसिक उत्पीड़न, पारिवारिक हिंसा, अंधविश्वास और महिलाओं की सुरक्षा जैसे विषयों पर गंभीर आत्ममंथन के लिए विवश अवश्य कर दिया है।
मानसिक प्रताड़ना हमेशा दिखाई नहीं देती, लेकिन उसके घाव सबसे गहरे होते हैं। लगातार अपमान, तिरस्कार, भय, ताने, सामाजिक अलगाव और भावनात्मक दबाव किसी भी व्यक्ति के आत्मविश्वास और मानसिक संतुलन को तोड़ सकते हैं। कई बार पीड़ित व्यक्ति बाहर से सामान्य दिखाई देता है, जबकि भीतर वह पूरी तरह टूट चुका होता है। इसलिए मानसिक उत्पीड़न को कभी भी हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए।
इस मामले का एक और चिंताजनक पक्ष अंधविश्वास से जुड़ा है। यदि जांच में यह सामने आता है कि कुंडली, ग्रह-दोष या अन्य कथित मान्यताओं के आधार पर किसी महिला को अशुभ, मनहूस या दोषयुक्त बताकर मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया, तो यह केवल अंधविश्वास नहीं बल्कि मानव गरिमा के विरुद्ध गंभीर कृत्य है। देहरादून पुलिस द्वारा इस पहलू की भी जांच का संकेत यह बताता है कि यदि किसी की कथित सलाह या भविष्यवाणी किसी व्यक्ति के उत्पीड़न का आधार बनती है, तो उसकी भूमिका की भी निष्पक्ष जांच की जा सकती है।
आज समाज में ऐसे अनेक स्वयंभू तांत्रिक, ढोंगी और गैर-जिम्मेदार भविष्यवक्ता सक्रिय हैं, जो लोगों के भय, दुख और असुरक्षा का व्यापार करते हैं। धार्मिक आस्था और व्यक्तिगत विश्वास का सम्मान अपनी जगह है, लेकिन किसी व्यक्ति को ग्रह-नक्षत्रों के नाम पर अशुभ, अभिशप्त या दुर्भाग्य का कारण घोषित करना न तो मानवीय है और न ही विवेकपूर्ण। किसी की कथित भविष्यवाणी यदि किसी परिवार में नफरत, भेदभाव या मानसिक उत्पीड़न का कारण बनती है, तो समाज को ऐसे व्यवहार पर गंभीरता से विचार करना होगा।
यह भी सच है कि आज का समय पहले जैसा नहीं है। सोशल मीडिया, महिला आयोग, पुलिस, कानूनी सहायता संस्थाएं, मनोवैज्ञानिक परामर्शदाता और अनेक सामाजिक संगठन सहायता के लिए उपलब्ध हैं। यदि कोई महिला या पुरुष किसी भी प्रकार की प्रताड़ना का सामना कर रहा है, तो समय रहते अपनी बात माता-पिता, विश्वसनीय मित्रों, शिक्षकों या संबंधित संस्थाओं तक पहुंचाना कमजोरी नहीं, बल्कि साहस का परिचायक है। कई बार समय पर मांगी गई मदद एक जीवन बचा सकती है।
समाज की भी जिम्मेदारी कम नहीं है। अक्सर पीड़ित व्यक्ति को सलाह दी जाती है कि “सब ठीक हो जाएगा”, “घर की बात घर में रहने दो” या “समझौता कर लो”। कई परिस्थितियों में संवाद और समझौता उपयोगी हो सकते हैं, लेकिन यदि किसी व्यक्ति के साथ लगातार अपमान, हिंसा या उत्पीड़न हो रहा हो, तो केवल चुप रहने की सलाह देना समाधान नहीं है। ऐसे समय में संवेदनशील हस्तक्षेप, कानूनी सहायता और सामाजिक सहयोग अधिक आवश्यक होते हैं।
सृष्टि कंडारी प्रकरण का अंतिम निर्णय न्यायालय करेगा, लेकिन यह घटना आज ही समाज को एक स्पष्ट संदेश देती है कि किसी भी रिश्ते की कीमत किसी व्यक्ति का आत्मसम्मान, मानसिक स्वास्थ्य और जीवन नहीं हो सकता। परिवारों में संवाद, सम्मान और संवेदनशीलता का वातावरण बनाना होगा। बेटियों और बहुओं को केवल रिश्ते निभाने की सीख नहीं, बल्कि अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाने का साहस भी देना होगा।
यदि यह दुखद घटना समाज को मानसिक प्रताड़ना के प्रति अधिक संवेदनशील बनाती है, अंधविश्वास के नाम पर होने वाले शोषण पर प्रश्न खड़े करती है और किसी एक पीड़ित व्यक्ति को समय रहते सहायता लेने की प्रेरणा देती है, तो यही सृष्टि कंडारी की स्मृति के प्रति हमारी सबसे सार्थक श्रद्धांजलि होगी।
गढ़वाली कुमाउनी वार्ता
समूह संपादक