14 वर्षीय किशोरी से दुष्कर्म के मामले में 6 समोसों की रिश्वत लेकर विवेचक ने एफआर (अंतिम आख्या) लगा दी। यह आरोप लगाते हुए पीड़िता के पिता ने अदालत में आपत्ति जताई। सुनवाई के बाद सोमवार को विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट नरेंद्र पाल राणा ने पुलिस की एफआर को निरस्त कर दिया। मामला जलेसर थाने का है।
किशोरी से दुष्कर्म के मामले में थाने में पॉक्सो एक्ट के तहत रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। विवेचक ने साक्ष्य का अभाव बताते हुए 30 दिसंबर 2024 को अदालत में एफआर लगा दी। पीड़िता के पिता ने 27 जून 2025 को विरोध याचिका (प्रोटेस्ट पिटीशन) दाखिल की। इसमें लिखा कि विवेचक ने मौके पर मौजूद चश्मदीद गवाहों के बयान अंकित नहीं किए। पीड़िता ने अपने बयान में दुष्कर्म की बात कही है। इसके बावजूद इस गंभीर प्रकृति के मामले की विवेचना त्रुटिपूर्ण की गई है।
आरोपी की समोसे की दुकान है। वहां पहुंचकर विवेचक ने महज 6 समोसे लेकर केस की विवेचना निराधार तथ्यों पर कर दी है जबकि विवेचक ने अपनी एफआर में लिखा कि किशोरी ने वीरेश से उधार समोसे मांगे, न देने पर विवाद हुआ और द्वेषवश मनगढ़ंत आरोप लगाकर केस दर्ज कराया गया है। सुनवाई के बाद अदालत ने एफआर को निरस्त कर मामले को परिवाद के रूप में दर्ज कर लिया है।
दर्ज रिपोर्ट के मुताबिक, 14 वर्षीय किशोरी 1 अप्रैल 2019 को स्कूल गई थी। दोपहर 1 बजे लौटते समय गांव का वीरेश उसे पकड़कर गेहूं के खेत में ले गया और उसके साथ अश्लील हरकतें कीं। दो लोगों के आने पर जातिसूचक गालियां और जान से मारने की धमकी देते हुए भाग गया। इस मामले में पुलिस का रवैया शुरू से ही एकपक्षीय नजर आया। रिपोर्ट दर्ज न होने पर किशोरी के पिता ने अदालत के आदेश पर केस दर्ज कराया था। विवेचना में एफआर लगा दी गई। पीड़िता के पिता ने अर्जी दी तो अदालत ने 31 अगस्त 2024 को पुन: विवेचना का आदेश दिया लेकिन पुन: विवेचना में भी एफआर लगा दी गई।
यह मामला उत्तरप्रदेश के जिले का है…
गढ़वाली कुमाउनी वार्ता
समूह संपादक